Madad Foundation: अपनी आय का 10% जरूरतमंदों के लिए समर्पित करती है टीम, प्रयागराज में ‘रविवार की रसोई’ से जारी है सेवा का अनूठा संकल्प

मदद फाउंडेशन की रविवार की रसोई का निःशुल्क भोजन वितरण अभियान


प्रयागराज में निराश्रितों के लिए घर का बना पौष्टिक भोजन, जरूरत के समय दवाइयां, कपड़े और कंबल उपलब्ध कराने की पहल; जनसहयोग और क्राउडफंडिंग से संचालित है सेवा अभियान


प्रयागराज। किसी के पास रहने के लिए घर नहीं, किसी के सिर पर छत नहीं और किसी के पास मुश्किल समय में साथ देने वाला अपना कोई नहीं। फुटपाथ पर जीवन बिताने वाले ऐसे लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी केवल गुजारा करने का संघर्ष है। भूख, बीमारी और मौसम की मार के बीच जीवन जी रहे इन लोगों तक मदद पहुंचाने के उद्देश्य से मदद फाउंडेशन (Madad Foundation) लगातार सेवा कार्य कर रहा है। संस्था द्वारा संचालित ‘रविवार की रसोई’ इसी मानवीय संकल्प का हिस्सा है, जिसके माध्यम से निराश्रितों और जरूरतमंद लोगों तक घर का बना पौष्टिक भोजन पहुंचाया जाता है। इस पहल की विशेषता केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि सेवा के प्रति समर्पण का वह भाव है, जिसके तहत संस्था के संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी, संस्थापिका अमृता तिवारी और उनकी टीम अपनी आय का 10 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित करती है।

अपनी कमाई का हिस्सा समाज के जरूरतमंद लोगों के नाम

मदद फाउंडेशन की सेवा यात्रा इस विचार पर आधारित है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल दूसरों से सहयोग मांगने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपनी ओर से भी योगदान देना जरूरी है। इसी सोच के तहत संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी, संस्थापिका अमृता तिवारी और उनकी टीम अपनी आय का 10 प्रतिशत हिस्सा सेवा कार्यों के लिए समर्पित करते हैं।

संस्था के इस प्रयास में जनसहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘रविवार की रसोई’ क्राउडफंडिंग और लोगों के स्वैच्छिक सहयोग से संचालित होती है। यानी इस अभियान को आगे बढ़ाने में संस्था की टीम के समर्पण के साथ उन लोगों की सहभागिता भी शामिल है, जो जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान देते हैं। यह मॉडल इस संदेश को सामने रखता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार भागीदारी निभानी चाहिए। किसी का छोटा आर्थिक सहयोग भी किसी जरूरतमंद के लिए भोजन की व्यवस्था करने में मददगार हो सकता है।

घर का बना पौष्टिक भोजन, सम्मान के साथ सेवा

फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता हमेशा आसान नहीं होती। ऐसे में मदद फाउंडेशन की ‘रविवार की रसोई’ के माध्यम से घर का बना पौष्टिक भोजन तैयार कर जरूरतमंदों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। संस्था का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि उन लोगों तक अपनत्व और सम्मान के साथ सहायता पहुंचाना है, जिन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों में अक्सर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। भोजन वितरण के इस अभियान में उन निराश्रित लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, जो फुटपाथ पर जीवन यापन कर रहे हैं और जिनके पास रहने के लिए अपना घर या सहारा उपलब्ध नहीं है।

मदद फाउंडेशन के अनुसार, ‘रविवार की रसोई’ के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों तक निःशुल्क भोजन पहुंचाया जा चुका है। संस्था के लिए यह आंकड़ा केवल सेवा की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की याद दिलाता है, जिसे आगे भी निरंतर निभाना है।

भोजन के साथ बीमारी और मौसम की मार में भी सहयोग

निराश्रित लोगों की जरूरतें केवल भोजन तक सीमित नहीं होतीं। खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने वाले लोगों के सामने बीमारी, ठंड और रोजमर्रा की बुनियादी आवश्यकताओं से जुड़ी अनेक चुनौतियां होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मदद फाउंडेशन की टीम समय-समय पर जरूरत के अनुसार दवाइयां, कपड़े, स्वेटर, जैकेट, कंबल, जूते और चप्पल जैसी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास करती है।

सर्दियों में गर्म कपड़े और कंबल किसी जरूरतमंद को ठंड से बचाने में सहायक होते हैं, वहीं जूते-चप्पल और पहनने योग्य कपड़े उसकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। बीमारी या अन्य कठिन परिस्थितियों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने का प्रयास भी संस्था की सेवा गतिविधियों का हिस्सा है। इस प्रकार संस्था की पहल भोजन वितरण से आगे बढ़कर जरूरतमंद लोगों की परिस्थितियों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम करती है।

चार वर्षों से निरंतर सेवा की कोशिश

मदद फाउंडेशन पिछले चार वर्षों से निराश्रितों और जरूरतमंद लोगों की सेवा में जुटा है। इस यात्रा में ‘रविवार की रसोई’ एक नियमित अभियान के रूप में आगे बढ़ी है। संस्था का मानना है कि सामाजिक सेवा का वास्तविक महत्व निरंतरता में है। जरूरतमंद व्यक्ति को केवल एक दिन सहायता मिलना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी परिस्थितियों को समझते हुए समय-समय पर सहयोग उपलब्ध कराने की कोशिश भी जरूरी है। संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी और संस्थापिका अमृता तिवारी के नेतृत्व में टीम इस प्रयास को आगे बढ़ा रही है। संस्था की अपील है कि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ें, ताकि भोजन और बुनियादी आवश्यकताओं से वंचित लोगों तक सहायता पहुंचाने का दायरा बढ़ाया जा सके।

आप भी बन सकते हैं इस मुहिम का हिस्सा

मदद फाउंडेशन का मानना है कि मानव सेवा किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जो लोग निराश्रितों और जरूरतमंदों की सहायता करना चाहते हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग देकर, भोजन सामग्री उपलब्ध कराकर या स्वयंसेवक के रूप में समय देकर इस अभियान में सहभागी बन सकते हैं।

क्राउडफंडिंग के माध्यम से संचालित ‘रविवार की रसोई’ समाज के लोगों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ती है—ताकि जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी रह सके। संस्था के लिए प्रत्येक सहयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामूहिक भागीदारी से ही सेवा के इस अभियान को आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि आपकी छोटी-सी मदद किसी भूखे व्यक्ति तक भोजन पहुंचा सकती है, किसी जरूरतमंद को ठंड से बचाने में सहायक हो सकती है या किसी असहाय व्यक्ति के कठिन समय में राहत दे सकती है, तो यह सहयोग सार्थक है। मदद फाउंडेशन इसी भावना के साथ समाज के लोगों से जुड़ने और मानवता की इस मुहिम में सहभागी बनने की अपील करता है।


संस्था से जुड़ने एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए:

वेबसाइट: https://www.madadfoundation.in/

संपर्क: 9795745555

मदद फाउंडेशन - कोई भूखा नहीं सोएगा, मानवता का साथ नहीं छूटेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ